बिहार के पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत का निधन।

बिहार के पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत का निधन

 

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

 

नई दिल्ली — मधुबनी के बाबूबरही के जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) विधायक और बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत का देर रात पटना के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में निधन हो गया। वे कोरोना संक्रमित थे और एक सप्ताह से एम्स में भर्ती थे। पिछले दो दिनों से उनकी स्थिति बेहद खराब थी , उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। डाक्टरों की टीम लगातार उन पर नजर बनाये हुये थे लेकिन भारी प्रयास के बावजूद भी उनको नही बचाया जा सका और गुरूवार की देर रात उन्होंने अंतिम साँस ली। वे पहले से ही किडनी रोग से ग्रसित थे , उनका लगातार डायलिसिस भी किया जा रहा था।

मुख्यमंत्री ने जताया शोक

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंत्री कपिलदेव कामत के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।उन्होंने अपने शोक संदेश में कहा कि स्वर्गीय कपिलदेव कामत जमीन से जुड़े राजनेता थे। कैबिनेट में मेरे सहयोगी और एक कुशल प्रशासक थे। उनके असामयिक निधन से मुझे व्यक्तिगत रूप से दुख पहुंँचा है। उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में अपूरणीय क्षति हुई है।

राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

कोविड-19 के लिये वर्तमान में लागू दिशा-निर्देश के तहत राजकीय सम्मान के साथ मंत्री कपिलदेव कामत का अंतिम संस्कार किया जायेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिवंगत आत्मा की शांति और उनके परिजनों और प्रशंसकों को दुख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

2005 में पहली बार विधायक बने

बहुत व्यवहार कुशल और मृदुभाषी कामत ने अंडर मैट्रिक तक की ही शिक्षा प्राप्त की थी। उनकी सक्रिय राजनीतिक 1980 के बाद शुरू हुई थी। 1980 के विधानसभा चुनाव में बाबूबरही विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी महेन्द्र नारायण झा के पक्ष में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।हालांकि विभिन्न कारणों से इनका संबंध विधायक महेन्द्र नारायण झा से खराब हो गया। तनातनी में कामत 1985 के विधानसभा चुनाव में बाबूबरही विधानसभा से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में खड़े हुये लेकिन वे चुनाव हार गये। इसके बाद कांग्रेस विधायक गुणानन्द झा के साथ राजनीति शुरू की थी। आगे इन्होंने कांग्रेस से नाता तोड़ लिया और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ० जगन्नाथ मिश्र के जन कांग्रेस के संयोजक बन गये। वर्ष 1990 के विधानसभा चुनाव में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. देवनारायण के पक्ष में उतरे और कांग्रेस प्रत्याशी महेन्द्र नारायण झा का पुरजोर विरोध किया। महेन्द्र नारायण झा चुनाव हार गये थे , इसके बाद कामत राजद में चले गये । नवंबर 2005 के विधानसभा चुनाव में जदयू ने एक बार फिर कामत पर भरोसा दिखाया और बाबूबरही से उतारा। इस बार राजद प्रत्याशी प्रो. उमाकान्त यादव को कामत ने हरा दिया और विधायक बने। 2015 के विधानसभा चुनाव में बाबूबरही विधानसभा क्षेत्र से जदयू ने कपिलदेव कामत को टिकट दिया था। इन्होंने एनडीए समर्थित लोजपा प्रत्याशी पूर्व विधान पार्षद विनोद कुमार साह को हरा दिया था।

बहू को बनाया है प्रत्‍याशी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले जदयू के कद्दावर नेता कपिलदेव कामत के स्‍वास्‍थ्‍य को देखते हुये जेडीयू ने इस बार हो रहे बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी मधुबनी के बाबूबरही सीट पर उनकी बहू मीना कामत को अपना प्रत्याशी बनाया है।

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