पूर्वांचल समाज के सभी संगठन एकजुट होकर समाज के समग्र विकास में योगदान दें — जितेंद्र कुशवाहा,

एनएचएल नेटवर्क।

दिल्ली। पूर्वांचल समाज में बढ़ती सामाजिक और आर्थिक असमानता को लेकर समाजसेवी जितेंद्र कुशवाहा ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समाज को आगे बढ़ाना है, तो सभी संगठनों को एकजुट होकर काम करना होगा। उनका कहना है कि समाज का विकास तभी संभव है जब अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को शिक्षा, अवसर और न्याय मिले। पिछले कुछ वर्षों में पूर्वांचल समाज राजनीतिक रूप से मजबूत जरूर हुआ है, लेकिन यह मजबूती अधूरी है, क्योंकि समाज का एक बड़ा हिस्सा आज भी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए संघर्ष कर रहा है।

उन्होंने बताया कि समाज के भीतर दो तरह की स्थिति दिखाई देती है—एक ओर आर्थिक रूप से संपन्न परिवार, वहीं दूसरी ओर वे लोग जिनके सामने आज भी रोजगार, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन की चुनौतियाँ खड़ी हैं। यह असमानता न सिर्फ सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर रही है, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक प्रगति के मार्ग में अवरोध बन रही है। ऐसे समय में सामाजिक संगठनों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे इस खाई को पाटने के लिए ठोस कदम उठाएँ।

जितेंद्र कुशवाहा ने शिक्षा को समाज के विकास की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी बताते हुए कहा कि शिक्षा की कमी ही आर्थिक कमजोरी, सामाजिक पिछड़ापन और अवसरों की कमी की सबसे बड़ी वजह रही है। उन्होंने संगठनों से अपील की कि वे शिक्षा जागरूकता अभियान, कौशल विकास कार्यक्रम और रोजगार-उन्मुख गतिविधियों को प्राथमिकता दें, ताकि समाज का हर युवा आत्मनिर्भर बन सके।

दिल्ली में रहकर पूर्वांचल समाज को संगठित करने की निरंतर पहल कर रहे जितेंद्र कुशवाहा ने कहा कि आने वाले समय में युवाओं को साथ लेकर समाज को नई दिशा देने का काम जारी रहेगा। वे मानते हैं कि यदि संगठन युवा शक्ति, महिलाओं और अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों को जोड़कर सामूहिक प्रयास करें, तो पूर्वांचल समाज शिक्षा, रोजगार, सामाजिक एकता और राजनीतिक भागीदारी—सभी क्षेत्रों में नई ऊँचाइयाँ हासिल कर सकता है।

उन्होंने सभी संगठनों से अपील की कि वे परस्पर सहयोग और समानता के सिद्धांत पर चलकर समाज को एक सूत्र में बाँधें। यदि यह सामूहिक प्रयास ईमानदारी से जारी रहा, तो पूर्वांचल समाज का भविष्य न केवल सुरक्षित और उज्ज्वल होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक भी बनेगा।

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