धामी सरकार का ‘संतुलित’ बजट जनता के लिए कितना ‘संतुलित’ ?

एनएचएल नेटवर्क📡

धामी सरकार का ‘संतुलित’ बजट जनता के लिए कितना ‘संतुलित’ ?
चुनाव से पूर्व प्रस्तुत इस बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ पेयजल पर अधिक आवंटन देखने को मिला है। इससे विशेष रूप से पहाड़ों में पेयजल की समस्या के समाधान की दिशा में सरकार का ध्यान जाता हुआ प्रतीत होता है। नदियों के उद्गम स्थल होने के बावजूद भी यहाँ की जनता पेयजल समस्या से त्रस्त रहती है। इस बजट से कुछ राहत मिलेगी, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।
दूसरी ओर, इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सरकार ने सराहनीय कार्य किया है, खासकर सड़कों के चौड़ीकरण का काम आज स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। बजट में गड्ढा-मुक्त सड़कों की बात भी की गई है। हालांकि इसके साथ-साथ प्राकृतिक संतुलन और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया जाना क्योंकि उत्तराखंड का पर्यटन उद्योग प्राकृतिक संरक्षण और हिमालय की संवेदनशीलता से जुड़ा मुद्दा है
बजट में खेलकूद को लेकर भी कुछ बातें कही गई हैं। पहाड़ भौगोलिक दृष्टि से खेलकूद के लिए उपयुक्त क्षेत्र रहे हैं और पूर्व में यहाँ से एथलेटिक्स, बॉक्सिंग आदि में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाएँ सामने आ चुकी हैं। यद्यपि खेल विभाग के लिए आवंटित धनराशि अधिक नहीं है, फिर भी यदि इसका सही तरीके से उपयोग किया जाए तो सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।
हालाँकि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद से ही स्वास्थ्य सेवाएँ लगातार बदहाली से गुजर रही हैं, खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं की स्थिति जगजाहिर है। अक्सर प्रसव पीड़ित महिलाओं और बुजुर्ग मरीजों को दूरस्थ क्षेत्रों में ले जाने की दर्दनाक खबरें सामने आती रहती हैं। आज भी पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधाएँ पर्याप्त नहीं हैं, जबकि इस बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए खर्च का आवंटन अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है।
आज भी प्रदेश की बजट प्राप्तियों का एक महत्वपूर्ण भाग केंद्र सरकार के अनुदान और कर्ज पर निर्भर है। फ़िस्कल डेफिसिट की चुनौतीइस निर्भरता को कैसे कम किया जाएगा ? फ़िस्कल डेफिसिट की चुनौती , इस पर बजट भाषण में कोई स्पष्ट चर्चा दिखाई नहीं देती।
सरकार ने अपना बजट प्रस्तुत कर दिया है, लेकिन अब जनता-जनार्दन का भी यह दायित्व है कि वह इस बात पर नजर रखे कि कि बजट आवंटन कितना सार्थक हुआ। और संतुलन (SANTULAN) की अवधारणा (समावेशी, आत्मनिर्भर नई सोच, तीव्र विकास, उन्नत गाँव एवं शहर, लोक-सहभागिता, आर्थिक शक्ति एवं न्यायपूर्ण व्यवस्था) कितनी धरातल पर उतरेगी, यह समय ही तय करेगा।
सीए सरोज आनंद जोशी

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