पत्रकारिता पर बाजारवाद का कब्जा, भविष्य को लेकर चिंता।

एनएचएल नेटवर्क📡

जयपुर। जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (जार) की ओर से शनिवार को जयपुर स्थित रानी महल होटल में “हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष : भविष्य एवं चुनौतियां” विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया शिक्षाविदों ने हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों के गौरवशाली इतिहास, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने देश के सामाजिक, राजनीतिक और लोकतांत्रिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है,

लेकिन वर्तमान समय में बाजारवाद, सोशल मीडिया की प्रतिस्पर्धा, फेक न्यूज, पत्रकारों पर बढ़ते दबाव, पीत पत्रकारिता इसके सामने बड़ी चुनौतियां बनकर उभरे हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं इतिहासकार जितेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि पत्रकारिता का इतिहास राजा-महाराजाओं के दौर से लेकर अंग्रेजी शासन और स्वतंत्र भारत तक फैला हुआ है। हर दौर में पत्रकारों ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए सच को सामने लाने का कार्य किया है। पहले पत्रकारों के पास आज जैसी तकनीक और संसाधन नहीं थे, फिर भी वे निर्भीक होकर जनता की आवाज बनते थे। कई पत्रकारों को जेल जाना पड़ा, उत्पीड़न सहना पड़ा, यहां तक कि अपने प्राणों की आहुति भी देनी पड़ी, लेकिन उन्होंने सत्य का साथ नहीं छोड़ा। राजशाही काल में भी राजदरबार की सूचनाएं ‘त्रिपोलिया गजट’ के माध्यम से जनता तक पहुंचाई जाती थीं। उन्होंने कहा कि “खबरें सड़क पर पड़ी हुई हैं, लेकिन उन्हें उठाने वाला कोई नहीं है। पत्रकार को 24 घंटे सजग और सक्रिय रहना होगा।”

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि आज लगभग हर व्यक्ति स्वयं को पत्रकार समझने लगा है, ऐसे में पेशेवर पत्रकारिता की विश्वसनीयता और गरिमा को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गई है।

गोष्ठी में विशेष वक्ता के रूप में शामिल जेएनयू मीडिया स्कूल के निदेशक डॉ. मौलिक शाह ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जिन शक्तियों ने पत्रकारिता को दबाने या नियंत्रित करने का प्रयास किया, उन्हें अंततः इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। जब तक पत्रकार निष्पक्ष और तथ्यात्मक खबरें जनता तक पहुंचाते रहेंगे, तब तक पत्रकारिता कभी समाप्त नहीं हो सकती। वर्तमान समय में पीत पत्रकारिता विश्वसनीयता पर सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरी है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार लल्लूलाल शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पत्रकारिता एक मिशन थी। उस दौर में पत्रकार समाज और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानकर कार्य करते थे। आपातकाल के बाद पत्रकारिता का स्वरूप धीरे-धीरे बदलने लगा और समय के साथ बाजारवाद का प्रभाव बढ़ता गया। वर्तमान में पत्रकारिता का बड़ा हिस्सा मिशन के बजाय व्यवसाय में तब्दील होता दिखाई देता है। बड़े मीडिया संस्थानों पर कॉरपोरेट और व्यापारिक घरानों का प्रभाव बढ़ने से संपादकीय स्वतंत्रता प्रभावित हुई है। आज पत्रकार पहले जैसी स्वतंत्रता के साथ काम नहीं कर पा रहा है। कई बार निष्पक्ष खबरें लिखना भी कठिन हो जाता है। सोशल मीडिया पर सबसे पहले खबर देने की होड़ ने विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के विस्तार ने हर व्यक्ति को संभावित पत्रकार बना दिया है, जिससे पेशेवर पत्रकारिता की पहचान और चुनौतीपूर्ण हो गई है। यदि पत्रकारिता को बचाना है तो पत्रकारों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि पत्रकारिता आज अनेक प्रकार की चुनौतियों से घिरी हुई है। विज्ञापन आधारित मॉडल का बढ़ता प्रभाव संपादकीय स्वतंत्रता को प्रभावित कर रहा है। एक समय पत्रकारिता समाज परिवर्तन का माध्यम थी और पत्रकार जनता की आवाज को मजबूती से उठाते थे, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। आज भी पत्रकारों में जुनून और समर्पण की कमी नहीं है, लेकिन कई प्रकार की संस्थागत और व्यावसायिक बंदिशों के कारण स्वतंत्र रूप से काम करना कठिन होता जा रहा है। डिजिटल और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने पारंपरिक पत्रकारिता के सामने पहचान का संकट खड़ा कर दिया है।

लोकतंत्र के चारों स्तंभों में गिरावट महसूस की जा रही है, लेकिन इसके लिए केवल पत्रकारिता को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।

जार के प्रदेश महासचिव सुरेश पारीक ने कहा कि देश और प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष कानून बनाए जाने की आवश्यकता है। पत्रकारिता को मजबूत और स्वतंत्र बनाए रखने के लिए सरकारों को ठोस नीति बनानी चाहिए, ताकि पत्रकार बिना किसी दबाव और भय के अपना दायित्व निभा सकें।

समारोह में स्वागत भाषण जार के प्रदेशाध्यक्ष संजय सैनी ने दिया। इस मौके पर जार जयपुर अध्यक्ष लेशिश जैन, महासचिव विशाल माथुर, जार ग्रामीण जिला अध्यक्ष सुरेश शर्मा, महासचिव बजरंग शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष जगदीश शर्मा ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किया।

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